राजस्थान में स्वास्थ्य के क्षेत्र में चलाए जा रहे निरामय राजस्थान अभियान के तहत अब मानसिक स्वास्थ्य को भी विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से गेटकीपर कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत पहले चरण में मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो आगे जिलों और ब्लॉक स्तर पर संबंधित कर्मचारियों को आत्महत्या रोकथाम एवं मानसिक स्वास्थ्य सहयोग विषय पर प्रशिक्षित करेंगे।
🎓 गेटकीपर प्रोग्राम: क्या है उद्देश्य?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने बताया कि यह कार्यक्रम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (NIMHANS) के N-SPIRIT केंद्र के सहयोग से शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य है कि समाज में तनाव, अवसाद या आत्महत्या की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों की समय रहते पहचान कर उन्हें उचित परामर्श और सहयोग उपलब्ध करवाया जा सके।
💬 आत्महत्या की सोच रखने वालों को मिल सकेगा मार्गदर्शन
गेटकीपर के रूप में प्रशिक्षित व्यक्ति हताश एवं निराश लोगों को सकारात्मक ऊर्जा देंगे और उन्हें आत्मघाती कदम उठाने से रोकने में मददगार बनेंगे। कार्यक्रम के दौरान आत्महत्या रोकथाम, स्ट्रेस मैनेजमेंट, भावनात्मक सहयोग, और मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
📚 तकनीकी सत्र और विशेषज्ञों की मौजूदगी
कार्यशाला में डॉ. टी. शुभमंगला (अतिरिक्त मिशन निदेशक), डॉ. ललित बत्रा (एसएसएम, मनोचिकित्सा केंद्र), डॉ. एसएस अग्रवाल (निदेशक, सीफू), डॉ. अनिल अग्रवाल (यूनिसेफ हेल्थ स्पेशलिस्ट) तथा डॉ. सांवरमल स्वामी (एसएनओ मानसिक स्वास्थ्य) जैसे विशेषज्ञों ने भाग लिया।
💡 मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को मिलेगा नया बल
राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई मनदर्पण, टेली-मानस, और अब गेटकीपर कार्यक्रम जैसे नवाचारों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षकों को यह सिखाया जा रहा है कि Self-Harm और Suicide की स्थितियों में किस प्रकार हस्तक्षेप करें और व्यक्ति को सहारा दें।