नई दिल्ली, 14 अगस्त 2024: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली के राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में ‘ग्लोबल बायो इंडिया 2024’ के पूर्वावलोकन समारोह में कहा कि “अगली औद्योगिक क्रांति जैव अर्थव्यवस्था से प्रेरित होगी।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि 1990 के दशक की पिछली औद्योगिक क्रांति आईटी से प्रेरित थी, तो 21वीं सदी की अगली क्रांति जैव-अर्थव्यवस्था पर आधारित होगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह, जो केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया’ आह्वान को याद किया। उन्होंने कहा कि इस पहल ने प्रौद्योगिकी, विज्ञान और नवोन्मेषण से जुड़े स्टार्टअप में एक नई क्रांति की शुरुआत की है, जिसमें से कई समुद्री अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और जैव अर्थव्यवस्था से संबंधित हैं।
ग्लोबल बायो इंडिया 2024: एक मेगा अंतर्राष्ट्रीय आयोजन
ग्लोबल बायो इंडिया 2024, भारत के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को वैश्विक सुर्खियों में लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह कार्यक्रम 12-14 सितंबर, 2024 को नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित किया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी हितधारक शामिल होंगे, जो भारत की बढ़ती जैव-अर्थव्यवस्था और विकास पथ का अवलोकन करेंगे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था पिछले दशक में 13 गुना बढ़ी है। 2014 में 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024 में यह 130 बिलियन डॉलर से अधिक हो गई है, और 2030 तक इसके 300 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने वैश्विक नवोन्मेषण सूचकांक में उल्लेखनीय सुधार किया है, जो 2015 के 81वें स्थान से चढ़कर 2024 में 40वें स्थान पर पहुंच गया है।
सरकारी समर्थन और निजी भागीदारी
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में सरकार की प्राथमिकता पर जोर दिया और कहा कि अंतरिम बजट में जैव अर्थव्यवस्था और जैव फाउंड्री जैसे महत्वपूर्ण विषयों का उल्लेख किया गया है, जो आमतौर पर चुनावी वर्षों में टाल दिए जाते हैं। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता देश और उसकी अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।”
उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान जैव प्रौद्योगिकी के महत्व को रेखांकित किया और हाल ही में पारित अनुसंधान एनआरएफ विधेयक की चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवोन्मेषण क्षेत्र में तेजी से प्रगति करने में सहायक होगा। इसके अलावा, उन्होंने स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेटर ‘बायो-नेस्ट’ का उल्लेख किया, जो इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 120 से अधिक स्टार्टअप को सहायता देने की उम्मीद है।
जैव प्रौद्योगिकी के रोजगार और उद्यमिता में योगदान
मंत्री ने जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता की क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने शाकाहारी श्रेणी में नए जैव प्रौद्योगिकी उत्पादों के उदाहरण दिए, जो लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। इसके अलावा, फार्मास्यूटिकल्स, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि और उद्यम जैसे अन्य उद्योगों पर जैव प्रौद्योगिकी के प्रभाव को भी रेखांकित किया।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों ने 75,000 करोड़ रुपये का मूल्यांकन हासिल किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 28,000 प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है, जो इस क्षेत्र की विकास क्षमता को दर्शाता है।
ग्लोबल बायो इंडिया 2024, जैव प्रौद्योगिकी और नवोन्मेषण के क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षाओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक प्रमुख मंच साबित होगा।