📍 जयपुर, 30 जुलाई।
राजस्थान में ऊंट अधिनियम-राज्य सरकार अब राजस्थान ऊंट (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 2015 को और प्रभावी बनाने की दिशा में अग्रसर हो गई है। इस संबंध में पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में अधिनियम के तहत नए नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब ऊंट के अंतरराज्यीय परिवहन की अनुमति केवल जिला कलेक्टर ही नहीं, बल्कि उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) भी देंगे। इससे ऊंट पालकों को दूसरे राज्यों में ऊंटों को चराने, कृषि या डेयरी कार्यों में उपयोग करने तथा पशु मेलों में ले जाने में कानूनी अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
🗣️ मंत्री कुमावत ने कहा:
“ऊंट पालकों को आने-जाने में जो दिक्कतें आ रही थीं, उन्हें देखते हुए एसडीएम को भी सक्षम अधिकारी घोषित करने का निर्णय लिया गया है। शीघ्र ही एक नई एसओपी (Standard Operating Procedure) भी जारी की जाएगी।”
इस निर्णय से राज्य के हजारों ऊंट पालकों को राहत मिलने की संभावना है। साथ ही बैठक में ऊंट पालन को व्यावसायिक रूप से लाभकारी बनाने के लिए राजस्थान सहकारी डेयरी संघ (RCDF) को ऊंटनी के दूध के विपणन पर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।
📞 बैठक के दौरान पूर्व विधायक रतन देवासी से फोन पर चर्चा कर उनके सुझाव भी लिए गए।
बैठक में पंचायतीराज और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री ओटाराम देवासी तथा पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. आनंद सेजरा भी उपस्थित रहे।
📌 मुख्य बिंदु:
- ऊंट अधिनियम 2015 के तहत नए नियमों का मसौदा तैयार।
- ऊंटों को दूसरे राज्यों में ले जाने की अनुमति अब एसडीएम भी दे सकेंगे।
- ऊंटनी के दूध के व्यापारिक विपणन की कार्ययोजना पर काम शुरू।
- ऊंट पालकों को कानूनी प्रक्रिया में राहत देने हेतु एसओपी जल्द।